मैं 'बैसाखी', मेरी सुनो....
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतवर्ष एक सबल संस्कृति, परंपरा, आस्था और विविधता वाला देश है। अलग-अलग भाषा और बोलियों वाले इस खूबसूरत देश में भांति-भांति के त्योहार मनाए जाते हैं, जिनको विशेष परिस्थिति, वातावरण और देशकाल के साथ पूरे मनोभाव के साथ मनाया जाता है। ऐसे ही त्योहारों में से मैं भी एक हूं...मैं बैसाखी हूं। क्योंकि मेरा अस्तित्व कहीं न कहीं बैसाख के महीने में छिपा है, इसलिए मुझे बैसाखी के रूप में मनाया जाता है, जो वैसाखी का ही अपभ्रंश है।