'सांड की आंख' से लेकर 'पिंक' तक: तापसी पन्नू की इन फिल्मों ने बदला समाज का नजरिया
मुंबई, 20 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक कहानी का केंद्र पुरुष अभिनेता और बड़े बजट की भव्य फिल्में रही हैं। हालांकि, बदलते दौर के साथ हिंदी सिनेमा की दिशा में भी अहम परिवर्तन देखने को मिला है। अब महिला प्रधान फिल्मों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। ये फिल्में न केवल व्यावसायिक रूप से सफल हो रही हैं, बल्कि अपनी विषयवस्तु और संदेश के कारण चर्चा का विषय भी बन रही हैं।