आधुनिक मूर्तिकला के पुरोधा: शंखो चौधरी ने भारत को दिया नया कलात्मक नजरिया
नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। कल्पना कीजिए एक ऐसे युवा की, जिसकी आवाज बेहद गहरी और सुरीली थी। साल 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' में हिस्सा लेने के कारण वह जेल में बंद था और सजा काटने के बाद बाहर खुली हवा में सांस ले रहा था। उसके मन में एक कश्मकश चल रही थी, "क्या मैं एक लोक गायक बन जाऊं? मेरी आवाज अच्छी है, लोग सुनेंगे।"