पितरों की शांति के लिए देश के ये तीर्थ क्यों माने जाते हैं सबसे पवित्र?
नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर स्थित शूलपाणेश्वर महादेव का तीर्थ केवल एक उपासना स्थल नहीं, बल्कि पापमुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धिकरण का एक प्रमुख केंद्र है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब भगवान शिव ने अंधकासुर नामक दैत्य का वध किया, तो उनका अजेय अस्त्र त्रिशूल (शूल) दैत्य के दूषित रक्त से मलिन हो गया था। अपने अस्त्र को शुद्ध करने के उद्देश्य से महादेव ने संपूर्ण पृथ्वी का भ्रमण किया और नर्मदा के तट पर आकर अपने त्रिशूल को धरती में गाड़ दिया। ऐसा करते ही वहां से एक निर्मल और पवित्र जलधारा ने त्रिशूल को धोकर शुद्ध कर दिया।