जैनेंद्र कुमार: जिसने समाज नहीं, इंसान के 'मन' को साहित्य का केंद्र बनाया
नई दिल्ली, 1 जनवरी (आईएएनएस)। कल्पना कीजिए एक ऐसे युवा का जो समाज की बात नहीं करता, वह खेतों-खलिहानों की बात नहीं करता। वह बात करता है 'मन' की। वह बात करता है उस सन्नाटे की, जो एक इंसान के भीतर तब होता है जब वह प्रेम, त्याग और अपराध बोध के बीच झूल रहा होता है। यह युवा कोई और नहीं, बल्कि जैनेंद्र कुमार थे।