दहेज में केवल चरखा और खादी स्वीकार किया, प्रधानमंत्री बने फिर भी कार के लिए लिया 5000 का लोन
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। ‘जय जवान, जय किसान’ यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत के सैनिकों और किसानों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और देश की आत्मनिर्भरता का संदेश है। इस ऐतिहासिक नारे के प्रणेता और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जीवन सादगी, ईमानदारी, त्याग और दृढ़ संकल्प की ऐसी मिसाल है, जिसे आज भी याद किया जाता है। 2 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है।