माघ मेले की खूबसूरती को पन्नों पर उकेरती कैलाश गौतम की कविता 'अमौसा के मेला', हर शब्द में है रंग
नई दिल्ली, 18 जनवरी (आईएएनएस)। माघ मेला हो, कुंभ हो या महाकुंभ हर बार अमावस्या का स्नान खास मायने रखता है। यह केवल स्नान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, पितरों का तर्पण और अनंत विश्वास का महापर्व है। माघ मेले की खूबसूरती को दिवंगत साहित्यकार कैलाश गौतम की कविता "अमौसा के मेला" में इतनी जीवंतता से उकेरा गया है कि हर पंक्ति में प्रयागराज के संगम तट की दिव्य भीड़, आस्था की लहरें, ग्रामीण जीवन की मासूमियत और लोक संस्कृति का रंग-बिरंगा मेला अपने रंग को बिखेरता दिखता है।