टॉयलेट एक 'सच्ची' कथा : सफाईकर्मियों को समानता दिलाने वाले संघर्ष के नायक, समाज की भी बदली सोच
नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। 15 अगस्त को देश आजादी का जश्न मना रहा होता है और उसी दिन एक ऐसे व्यक्ति की सांसें थम गई थी, जिसने अपनी जिंदगी उन लोगों की आजादी के लिए लगा दी, जिन्हें समाज ने बराबरी से दूर रखा था। यह कहानी है बिंदेश्वर पाठक की, एक ऐसे व्यक्ति की, जिसने शौचालय को सिर्फ स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि इंसान की गरिमा, समानता और सामाजिक बदलाव का हथियार बना दिया।