यादों में महेंद्र : देशभक्ति की आवाज, जो हर बार 'अजनबी' बनने के लिए रही 'बेचैन'
मुंबई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। यह बात 1957 की है, जब मुंबई का 'मेट्रो' सिनेमा हॉल खचाखच भरा हुआ था। मंच पर नौशाद अली, अनिल बिस्वास, सी रामचंद्र और मदन मोहन जैसे दिग्गज संगीतकार बैठे थे। 'मर्फी ऑल इंडिया गायन प्रतियोगिता' का आयोजन हो रहा था। उसी वक्त एक नौजवान मंच पर आया और जैसे ही उसने "इलाही कोई तमन्ना नहीं जमाने में, मेरी जवानी तो गुजरी शराबखाने में..." गीत गाया, पूरा हॉल सन्न रह गया।