पद्म भूषण विद्यानिवास मिश्र: हजारी प्रसाद-कुबेरनाथ के साथ त्रयी का तीसरा स्तंभ, परंपरा और आधुनिकता के बीच बनाया पुल
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य जगत को उस समय एक अपूरणीय क्षति हुई, जब प्रसिद्ध साहित्यकार, संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान, भाषाविद् और सफल संपादक पंडित विद्यानिवास मिश्र ने दुनिया को अलविदा कहा। 14 फरवरी 2005 को देवरिया से वाराणसी जाते समय हुई सड़क दुर्घटना में उनका लगभग 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जाना हिंदी के ललित निबंध परंपरा के एक प्रमुख स्तंभ का अंत था, जिसे हजारी प्रसाद द्विवेदी और कुबेरनाथ राय के साथ त्रयी में गिना जाता है।
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