जब हौसलों के आगे मुश्किल हालात रोक नहीं पाए कदम, कृत्रिम पैरों से अरुणिमा सिन्हा ने सबसे ऊंची चोटी पर लिखी जीत की इबारत
नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। 11 अप्रैल 2011 की वो रात, जिसने एक होनहार खिलाड़ी की जिंदगी बदल दी। लगभग मौत को छूकर लौटने के बाद इस खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और फिर ऐसा इतिहास रच दिया, जिसकी कल्पना कर पाना हर किसी के लिए असंभव है। यह कहानी है भारत की उस दिव्यांग खिलाड़ी की, जिसने बुलंद हौसलों और इरादे के साथ अपने कृत्रिम पैरों से विश्व की सबसे ऊंची चोटी को भी छोटा साबित कर दिया। बात हो रही है माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की।