राम प्रसाद बिस्मिल: 'सरफरोशी की तमन्ना' के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमने वाला क्रांतिवीर
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है।' इस पंक्ति से लगभग हर भारतीय परिचित है। यह पंक्ति आज भी देशवासियों के हृदय में देशभक्ति की भावना का संचार करती है। इसे स्वतंत्रता सेनानियों के बीच लोकप्रिय बनाने वाले महान क्रांतिकारी, कवि और लेखक पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने न केवल अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, बल्कि अपनी लेखनी के माध्यम से युवाओं के भीतर स्वतंत्रता की ज्वाला भी प्रज्वलित की। बिस्मिल ने महज 30 वर्ष की आयु में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था।