कच्छ की कॉपर बेल कला को मिली वैश्विक पहचान, अमेरिका-यूके तक हो रहा घंटियों का निर्यात
कच्छ, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। गुजरात के कच्छ की प्राचीन कॉपर बेल यानी तांबे की घंटियों की हस्तकला आज वैश्विक पहचान बना चुकी है। कच्छ के झुरा गांव को इस पारंपरिक कला का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां कई पीढ़ियों से कारीगर इस विरासत को संजोए हुए हैं। समय के साथ यह कला न केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित रही, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत जगह बना चुकी है।