'का से कहूं मैं दरददिया हो रामा, पिया परदेस गए'; भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की 'बिदेसिया' 109 साल बाद भी अमर
नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। आज की आधुनिक जिंदगी में रिश्ते बेहद नाजुक हो गए हैं। आए दिन शादियां टूट रही हैं, छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो रहे हैं और कुछ मामलों में पत्नी द्वारा पति की हत्या जैसे जघन्य अपराध भी सामने आ रहे हैं। इसी समय में भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर का नाटक बिदेसिया एक बार फिर याद आता है। ‘का से कहूं मैं दरददिया हो रामा, पिया परदेस गए’ यह पंक्ति आज भी उन महिलाओं के लिए सटीक संदेश है, जो जरा-जरा सी बात पर पति पर अत्याचार करने से गुरेज नहीं करतीं।