November 2, 2026 7:13 PM
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। कैमरे के सामने इंकलाब, कैमरे के बाहर खामोशी। पर्दे पर अन्याय से भिड़ने वाले नायक असल जिंदगी में क्या बुजदिल होते हैं। जनता पर बरसती लाठियों और पानी की बौछारों के बीच आखिर यह फिल्मी हीरो कहां गायब हो जाते हैं? करोड़ों की कमाई लाखों प्रशंसक सोशल मीडिया पर पोस्टों की बौछार, लेकिन जब जनता अपने हक के लिए सड़क पर उतरती है तब बड़े-बड़े सितारों की जुबान पर ताले क्यों लटक जाते हैं? इनमें चाहे शहंशाह हो या फिर कोई और। मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में आयोजित तहजीब के मंच से संपादक संजय शर्मा ने बॉलीवुड की चुप्पी पर सवालों के वार ने शांत समुंदर में तूफान ला खड़ा किया। तहजीब के मंच पर रियल हीरो मनोज बाजपेई बैठे थे जो संजय शर्मा के सवालों का जवाब दे रहे थे। संजय शर्मा का सवाल सीधा था, मगर निशाना पूरी स्टार संस्कृति की चमकदमक पर था कि स्टार खमोश क्यों रहते हैं इस सवाल के जवाब में और मनोज ने भी दो टूक पूछ लिया कि, “जो लोग जनता के मुद्दों पर खामोश रहते हैं, उन्हें आप स्टार ही क्यों मानते हैं?”