रवि टंडन : पीएमटी में हुए फेल, लेकिन बने सिनेमा के 'सफल सर्जन'
मुंबई, 10 फरवरी (आईएएनएस)। यह 1950 के दशक के उत्तरार्ध की बात है। आगरा की गलियों से निकला एक नौजवान मुंबई के फिल्मिस्तान स्टूडियो के बाहर खड़ा था। जेब में चंद रुपए और आंखों में बड़े सपने, लेकिन वह सपना निर्देशन का नहीं बल्कि 'डॉक्टर' बनने का था। नियति को कुछ और ही मंजूर था। प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में मिली असफलता ने उस युवक को चिकित्सा जगत से तो दूर कर दिया, लेकिन कला के उस 'ऑपरेशन थिएटर' में ला खड़ा किया जहां वह आगे चलकर कहानियों और किरदारों की धड़कनें पढ़ने वाला था। यह कहानी है भारतीय सिनेमा के उस 'सज्जन निर्देशक' की, जिसे दुनिया रवि टंडन के नाम से जानती है।
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