मिथिला मखाना से चांदी तरकाशी तक, भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे रहे पूर्वी और मध्य भारत के 'जीआई' उत्पाद
नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारत की असली पहचान उसकी विविधता, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों में बसती है। देश के अलग-अलग राज्यों में सदियों से तैयार हो रहे पारंपरिक उत्पाद आज दुनिया भर में अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं। इन उत्पादों को मिलने वाला जीआई टैग यानी ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ न केवल उनकी विशिष्ट पहचान को सुरक्षित करता है, बल्कि स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों की मेहनत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम भी करता है।