किसी भी दौर में भाषा नई होती जाती है, अगर ऐसा नहीं होगा तो वो मर जाएगी : नीलोत्पल मृणाल
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी, सांस्कृतिक और जमीन से जुड़ी हुई ऐसी भाषा है, जिसने कई स्थानीय भाषाओं को खुद में समेटा है। हिंदी साहित्य ने ब्रज, अवधी, मैथिली, राजस्थानी और भोजपुरी जैसी समृद्ध लोक बोलियों की विरासत को अपने साथ जोड़ा, जिससे इसकी जड़ें गांवों और आम जन तक पहुंचीं। हिंदी दिवस के अवसर पर आईएएनएस ने लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल से खास बातचीत की।