यादों में जयशंकर प्रसाद, आज भी प्रासंगिक 'कामायनी' के मनु और श्रद्धा?
नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। यदि जयशंकर प्रसाद ने केवल 'कामायनी' ही लिखी होती, तब भी वे अमर रहते। 1936 में प्रकाशित यह महाकाव्य मनु (मानव) और श्रद्धा (भावना) की पौराणिक कथा के माध्यम से आधुनिक मनुष्य के मानसिक अंतर्द्वंद्व की कहानी है। चिंता से शुरू होकर आनंद तक की यह यात्रा हमें सिखाती है कि बुद्धि और हृदय के समन्वय के बिना मनुष्य कभी पूर्ण नहीं हो सकता।