ज्योतिराव फुले: शादी समारोह से जबरन निकाले गए तो शिक्षा के हथियार से जातिगत भेदभाव के खिलाफ छेड़ी लड़ाई, रचा इतिहास
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। यह बात साल 1848 की है, जब पुणे की एक संकरी सड़क से एक सवर्ण दोस्त की बारात बड़े धूमधाम से गुजर रही थी। उस सवर्ण दोस्त की बारात में शामिल होने पर जातिगत भेदभाव के कारण ज्योतिराव गोविंदराव फुले को 'शूद्र' बताकर धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया था।