बनारस की रंगभरी एकादशी : काशी विश्वनाथ संग ससुराल पहुंचती हैं गौरा, गौना में शामिल होते हैं ‘गण’
वाराणसी, 2 मार्च (आईएएनएस)। 'मईया गौरा चलेलीं ससुराली हो...' और गौरा के साथ पूरा बनारस (वाराणसी) झूम जाता है। रंगभरी एकादशी पर ये गीत फगुआ के रंग को और गाढ़ा कर देता है। फगुआ (होली) से ठीक चार दिन पहले बाबा श्री विश्वनाथ की नगरी काशी एक अलग ही रंग में रंगी दिखाई देती है। चहुंओर उल्लास छाया रहता है और हो भी क्यों न, उस दिन विश्व के नाथ माता पार्वती को मायके से उनके घर काशी जो ले आते हैं। ऐसे में रंगभरी एकादशी पर धर्मनगरी रंग जाती है, उल्लास, खुशी, भावनाओं और भक्ति के रंग में।