पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसी वैचारिक क्रांति के सूत्रधार, जिसकी फसल भारत में अब पक कर हुई तैयार
नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। राजनीति में तंज और मजाक में खास फर्क नहीं होता, लेकिन अक्सर विरोधियों के हमलों को अपना हथियार बनाने की कला सियासत के कुछ ही महारथियों में होती है और जिसके पास रही है, वह देश या पार्टी का नेतृत्वकर्ता बना है। यह गुण सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही नहीं, जिन्हें विरोधियों ने सैकड़ों बार निजी हमलों के घात पहुंचाने की कोशिश की, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के भी यही गुण रहे, जिन्होंने मजाक को इस तरह धारण किया कि वह सकारात्मक छवि के रूप में जिंदगी भर के लिए नाम से जुड़ गया।