मुंबई, 13 मार्च (आईएएनएस)। कहते हैं कि सफलता कभी मुफ्त में नहीं मिलती, यह संघर्ष और जज्बे के रूप में अपनी कीमत वसूल लेती है। जितने बड़े सपने, उतना ही कठिन सफर। बॉलीवुड के 'एक्शन किंग' रोहित शेट्टी भी इसी तरह की विषम परिस्थितियों से गुजरे हैं। आज उनकी फिल्में करोड़ों कमा रही हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वाहन के लिए पैसे न होने पर वह कई किलोमीटर तक पैदल चलते और कई बार भूखे भी रह जाते थे।
पिता की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट छा गया, फिर भी रोहित ने हार नहीं मानी और मेहनत से खुद को 'सिंघम' जैसा मजबूत बनाया। छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करने वाले रोहित शेट्टी आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सफल और लोकप्रिय निर्देशकों में शुमार हैं। हालांकि, यहां तक का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
14 मार्च 1974 को मुंबई में जन्मे रोहित शेट्टी के पिता, एमबी शेट्टी, एक मशहूर स्टंटमैन और एक्टर थे, जो 1970-80 के दशक में फिल्मों में आइकॉनिक विलेन के रोल निभाते थे। मां रत्ना शेट्टी जूनियर आर्टिस्ट थीं और छोटे-मोटे रोल करती थीं। लेकिन रोहित महज पांच साल के थे, जब पिता की मौत हो गई। परिवार पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया। चार बहनों और दो भाइयों के साथ घर चलाना मुश्किल हो गया। ऐसे में रोहित ने बहुत कम उम्र में काम शुरू कर दिया।
तमाम संघर्षों के बाद 17 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'फूल और कांटे' में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में एंट्री की। इसके बाद 'सुहाग' में अक्षय कुमार के स्टंट डबल बने। 'हकीकत' जैसी फिल्मों में तब्बू के कपड़े प्रेस करने जैसे छोटे काम भी किए। कम ही लोग जानते हैं कि उनकी पहली कमाई सिर्फ 35 रुपए थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि "मुझे खाने और बस के किराए में से एक चुनना पड़ता था। कई बार भूखा सोना पड़ा। पैदल चलकर सेट पर जाना पड़ता था।"
ये मुश्किलें उन्हें तोड़ने की बजाय और मजबूत बनाती गईं। धीरे-धीरे रोहित ने स्टंट और एक्शन में महारत हासिल की। उन्होंने कई फिल्मों में स्टंट कोरियोग्राफी की और फिर निर्देशन की ओर रुख किया। उनकी पहली बड़ी सफलता 'गोलमाल' सीरीज से मिली, जो आज भी हंसी-मजाक की मिसाल है। 'चेन्नई एक्सप्रेस' जैसी रोमांटिक कॉमेडी ने उनके करियर में चार चांद लगाए। लेकिन असली पहचान उन्हें 'सिंघम' सीरीज से मिली, जहां एक्शन के लेवल को उन्होंने नए आयाम दिए।
आज इंडस्ट्री में एक्शन का नाम ही रोहित शेट्टी बन चुका है। उनकी फिल्मों में गाड़ियां उड़ाना, बड़े-बड़े धमाके, और हाई-ऑक्टेन थ्रिलये सब ट्रेडमार्क बन चुके हैं। उनकी 'कोप यूनिवर्स' में 'सिंघम', 'सिम्बा', 'सूर्यवंशी', और 'सिंघम अगेन' जैसी सुपरहिट फिल्में हैं। 'गोलमाल' फ्रेंचाइजी ने परिवारों को थिएटर में बांधे रखा।
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