विशेष: पद्मश्री प्रो. दिगंबर हांसदा, संविधान का 'ओलचिकी' में किया अनुवाद, 'संथाल' की रहे सशक्त आवाज
रांची, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। संथाली साहित्य के विमर्श में आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना केंद्र बिंदु में रहे हैं। झारखंड के संथाल परगना में देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज और दुमका जैसे जिले शामिल हैं, और यहां की शख्सियतों में डॉ. दिगंबर हांसदा किसी 'पूज्य' व्यक्तित्व से कम नहीं हैं।