स्वयं प्रकाश: वे इंजीनियर जो प्रेमचंद की मशाल के बने नए वाहक, कलम से बदला समाज का नक्शा
नई दिल्ली, 6 दिसंबर (आईएएनएस)। कल्पना कीजिए, एक ऐसा व्यक्ति जिसके हाथों में मशीन के पुर्जे और नट-बोल्ट होने चाहिए थे, जिसने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, वह हिंदी साहित्य को अपनी कहानियों से एक नई 'सामाजिक इंजीनियरिंग' प्रदान करता है। यह कहानी है स्वयं प्रकाश की।