परीक्षा से पहले जलाई मार्कशीट और सेवा को चुना जीवन, विनायक से विनोबा भावे बनने की कहानी
नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। साल 1916 की एक दोपहर थी। एक छात्र विनायक इंटरमीडिएट की परीक्षा देने के लिए बॉम्बे (मुंबई) जा रहा था। ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए उसके मन में गहरा द्वंद्व था। अचानक उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी कल्पना कोई साधारण छात्र नहीं कर सकता था।