सावित्रीबाई फुले: कीचड़, पत्थर और तानों के बीच जलाई नारी शिक्षा की मशाल, सदियों की गुलामी को दी चुनौती
नई दिल्ली, 2 जनवरी (आईएएनएस)। पुणे की संकरी गलियों में साल 1848 की एक सुबह एक महिला अपने घर से निकली। उसके हाथ में कुछ किताबें थीं और आंखों में एक अजीब सा आत्मविश्वास। जैसे ही वह सड़क पर आगे बढ़ी, गलियों के कोनों पर खड़े लोग फुसफुसाने लगे। अचानक एक पत्थर उनके कंधे पर आकर लगा।