सुषमा स्वराज: बैर की राजनीति में मुरीद बना लेने का कमाल, जिनकी जुबान पर होते थे जनता के जज्बात
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। "तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लूटा? हमें रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का ख्याल है।" यह अद्भुत वक्ता, कुशल राजनीतिज्ञ, पूर्व विदेश मंत्री और 'पद्म विभूषण' सुषमा स्वराज की राजनीति का अंदाज था। एक ऐसी नेता, जिन्होंने भाजपा की राजनीति भले ही की, लेकिन वह जहां भी और जब भी बोलने के लिए खड़ी हुईं, लगा कि हिंदुस्तान बोल रहा है। वह हिंदुस्तान को सोचती थीं, हिंदुस्तान को ही जीती थीं और हिंदुस्तान को ही ओढ़ती-बिछाती थीं। असल में वह राजनीति की सुषमा थीं और स्वराज उनके दिल में बसता था।