डिजिटल डिटॉक्स का विज्ञान: जब दिमाग कहता है, 'बस अब नहीं'
नई दिल्ली, 13 नवंबर (आईएएनएस)। दिन की शुरुआत मोबाइल की स्क्रीन से और सोने से पहले भी उसके साथ घंटों बिताना आधुनिक जीवन का अहम शगल बन गया है। औसतन एक व्यक्ति रोजाना 6 से 7 घंटे स्क्रीन पर बिताता है, और यही आंकड़ा धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। हार्वड मेडिकल स्कूल की 2025 की एक रिपोर्ट बताती है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सर्किट' को बदल देता है। ये वही हिस्सा है जो खुशी, प्रेरणा और आपकी एकाग्रता को नियंत्रित करता है।