नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार खेल उपकरण और खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र को देश की आर्थिक वृद्धि और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देख रही है। नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार संजीत सिंह ने मंगलवार को कहा कि पिछले एक दशक से केंद्र सरकार खेल उपकरण विनिर्माण को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में बढ़ावा दे रही है और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में संजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन के अनुरूप नीति आयोग ने खेल उपकरण विनिर्माण क्षेत्र के विकास के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया था। उन्होंने बताया कि इस रोडमैप को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अपनाया और इसे एक सफल योजना के रूप में लागू किया गया है।
उन्होंने कहा, "पिछले एक दशक से भारत सरकार खेल उपकरण और खेल सामग्री विनिर्माण को एक रणनीतिक विकास चालक के रूप में आगे बढ़ा रही है। नीति आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने एक प्रभावी योजना में परिवर्तित किया है।"
संजीत सिंह ने आगे कहा कि खेल उपकरण निर्माण क्षेत्र में काम करने वाली लगभग 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) श्रेणी की हैं। नीति आयोग द्वारा किए गए अध्ययन और उद्योग जगत से हुई बातचीत में यह सामने आया कि इस क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां वित्तीय नहीं, बल्कि नियामकीय और प्रक्रियागत हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकांश विनिर्माण इकाइयां विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं, नियमों और अन्य गैर-वित्तीय बाधाओं से प्रभावित होती हैं। इन बाधाओं को दूर कर उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाया जा सकता है।
उन्होंने आगे आईएएनएस को बताया, "हमारे अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि खेल उपकरण बनाने वाली इकाइयों की अधिकांश समस्याएं वित्तीय नहीं हैं, बल्कि नियमों, प्रक्रियाओं और अन्य बाधाओं से जुड़ी हुई हैं।"
संजीत सिंह ने कहा कि किसी भी उत्पाद की सफलता में ब्रांडिंग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन भारत को केवल स्थापित वैश्विक ब्रांडों का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य 'मेड इन इंडिया' को स्वयं एक मजबूत वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "ब्रांडिंग किसी भी क्षेत्र की सफलता की जीवनरेखा है। लेकिन हमें अपने विनिर्माण को बढ़ाने के लिए केवल बड़े ब्रांडों का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमारा लक्ष्य 'मेड इन इंडिया' को एक मजबूत वैश्विक पहचान दिलाना होना चाहिए।"
संजीत सिंह के अनुसार, 'मेड इन इंडिया' ब्रांड किसी एक व्यक्ति या संस्था के प्रयासों से नहीं बन सकता। इसके लिए खिलाड़ियों, खेल संगठनों, युवा प्रतिभाओं, कॉर्पोरेट क्षेत्र और खेल आयोजनों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्सकॉम जैसे मंच और खेल उद्योग से जुड़े आयोजन भारत के खेल विनिर्माण क्षेत्र को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जब खिलाड़ी भारतीय उत्पादों का उपयोग करेंगे और उद्योग गुणवत्ता के उच्च मानकों को अपनाएंगे, तब भारतीय खेल उपकरण विश्व बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकेंगे।
नीति आयोग के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खेल उपकरण उद्योग को भी उसी तरह आगे बढ़ाया जाए, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारतीय एमएसएमई क्षेत्र को भी वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
--आईएएनएस
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