यादों में आशा: रोते हुए गाया था 'बंदिनी' का वो गीत, एसडी बर्मन से पड़ी थी जबरदस्त डांट
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। आशा ताई नहीं रहीं। हिंदी फिल्म जगत और उनके चाहने वाले उन्हें प्यार से 'ताई' ही कहते थे। इनका हरेक गाना एक मिसाल और धुआंधार था। कहां तान लेनी है, किस अंतरे पर आवाज के साथ खेलना है, कौन सी जगह पर भावनाओं का तड़का लगाना है और कहां मुरकी लेकर हैरान करना है, इसमें माहिर थीं पद्म विभूषण आशा भोसले। जैसे आग में तपकर सोना कुंदन बन जाता है, वैसा ही इस जिद्दी सिंगर के लिए कहा जा सकता है। लता की बहन को सब कुछ थाली में सजा कर नहीं मिला; बड़ा जतन किया रियाज करते हुए गायकी में धमक के साथ अपना मुकाम बनाने के लिए!