पुरुषोत्तम मास विशेष : दक्षिण भारत का अनोखा नारायण मंदिर, आठ हिस्सों वाले शिखर की जमीन पर नहीं पड़ती परछाईं

IANS | June 6, 2026 6:03 PM

मदुरै, 6 जून (आईएएनएस)। भगवान विष्णु को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास चल रहा है, जो नारायण की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पुरुषोत्तम या अधिक मास में किए गए दर्शन-पूजन का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। आज आपको नारायण के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने आप में खास और अद्भुत है।

छत्तीसगढ़: 16 पत्थर के स्तंभों पर टिकी सदियों पुरानी आस्था की विरासत, यहां विराजती हैं 'त्रिदेवियां'

IANS | May 31, 2026 7:28 PM

बिलासपुर, 31 मई (आईएएनएस)। देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में भगवती के कई दिव्य व प्राचीन मंदिर हैं, जहां आस्था, सुंदरता के साथ इतिहास की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित रतनपुर में भी ऐसा ही एक मंदिर है। श्री महामाया देवी मंदिर प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है। 12वीं शताब्दी में निर्मित यह भव्य मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता, ऐतिहासिक विरासत और वास्तुकला के कारण श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहा है।

पुरुषोत्तम मास विशेष : 16वीं शताब्दी में निर्मित नारायण का अद्भुत मंदिर, जहां विराजते हैं वेंकटरमण स्वामी

IANS | May 30, 2026 10:48 PM

हैदराबाद, 30 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास का खासा धार्मिक महत्व है। इस महीने में भगवान विष्णु की आराधना, पूजा, व्रत, दान और मंदिर दर्शन का विशेष महत्व है। देश-दुनिया में नारायण के कई भव्य मंदिर हैं; इसी कड़ी में आपको आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के ताड़ीपत्री स्थित अद्भुत मंदिर के बारे में बताते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का तो इतिहास का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत के कारण भी खास स्थान रखता है।

पुरुषोत्तम मास विशेष: ओडिशा के प्राचीन मंदिर में वासुदेव संग विराजमान हैं बलराम व सुभद्रा, महाप्रसाद की परंपरा

IANS | May 29, 2026 11:30 PM

भुवनेश्वर, 29 मई (आईएएनएस)। नारायण को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास चल रहा है। इस पावन महीने में भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व होता है। ऐसे में हम आपको देश-दुनिया के उन मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां नारायण के दर्शन मात्र से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसा ही भव्य मंदिर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है।

पुरुषोत्तम मास विशेष: 'वृंदावन ठाकुर' के सात प्रमुख मंदिरों में से एक, श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ने किया था मूर्ति का निर्माण

IANS | May 28, 2026 7:04 PM

जयपुर, 28 मई (आईएएनएस)। नारायण का अत्यंत प्रिय पवित्र पुरुषोत्तम मास चल रहा है। सनातन धर्म में इस महीने को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान नारायण और उनके विभिन्न रूपों के दर्शन, पूजन, दान और पुण्य का खास महत्त्व है। ऐसे में देशभर के नारायण से जुड़े प्रमुख मंदिरों की श्रृंखला में आज हम बात कर रहे हैं जयपुर के प्रसिद्ध एक ऐसे मंदिर की, जो ‘वृंदावन ठाकुर’ के सात प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों का भी पसंदीदा है।

नारायण के वराह अवतार को समर्पित 7वीं शताब्दी का भव्य मंदिर, एक ही चट्टान से तराशा गया चमत्कार

IANS | May 27, 2026 5:20 PM

चेन्नई, 27 मई (आईएएनएस)। भगवान विष्णु को अति प्रिय पुरुषोत्तम मास या अधिक मास चल रहा है। इस महीने नारायण के दर्शन-पूजन का विशेष विधान है। देश भर में ऐसे कई देवालय हैं, जो अध्यात्म के साथ ही भारतीय वास्तुकला और प्राचीन संस्कृति को दिखाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु में है, जिसे 7वीं शताब्दी में एक ही विशाल चट्टान को काटकर बनाया गया। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में स्थित वराह गुफा मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार को समर्पित है।

कश्मीरी केसर से बनारसी साड़ी तक, परंपरा और संस्कृति के साथ देश की पहचान बने उत्तर भारत के ये 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 27, 2026 3:04 PM

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। उत्तर भारत के पारंपरिक उत्पाद आज देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई मजबूती दे रहे हैं। कश्मीर का केसर, हिमाचल की कुल्लू शॉल, उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी, राजस्थान की ब्लू पॉटरी और उत्तराखंड की लोक कलाएं अब केवल स्थानीय उत्पाद नहीं रह गए, बल्कि गांव और छोटे शहरों से निकलकर ये जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) उत्पाद ग्लोबल मंच पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं।

मिथिला मखाना से चांदी तरकाशी तक, भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे रहे पूर्वी और मध्य भारत के 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 26, 2026 12:02 PM

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारत की असली पहचान उसकी विविधता, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों में बसती है। देश के अलग-अलग राज्यों में सदियों से तैयार हो रहे पारंपरिक उत्पाद आज दुनिया भर में अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं। इन उत्पादों को मिलने वाला जीआई टैग यानी ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ न केवल उनकी विशिष्ट पहचान को सुरक्षित करता है, बल्कि स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों की मेहनत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम भी करता है।

आंध्र प्रदेश की सिम्हाचलम पहाड़ी पर स्थित वह मंदिर, जहां भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नारायण ने लिया था अवतार

IANS | May 25, 2026 10:41 PM

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। वर्तमान में भगवान विष्णु को प्रिय पुरुषोत्तम मास चल रहा है। इस महीने में दान-पुण्य के साथ ही नारायण के दर्शन-पूजन का भी विशेष विधान है। इस महीने में भगवान विष्णु के दर्शन-पूजन की विशेष मान्यता है। देश -दुनिया में नारायण के कई मंदिर हैं, जो श्रद्धा और इतिहास के साथ वास्तुकला का अद्भुत संगम भी दिखाते हैं। ऐसा ही एक भव्य मंदिर आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम के सिम्हाचलम पहाड़ी पर बना श्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर है। राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल मंदिर को लेकर मान्यता है कि भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान नरसिंह इसी स्थान पर प्रकट हुए थे।

मिट्टी, मेहनत और पहचान : गांवों से निकलकर दुनिया को अपनी कहानी सुना रहे पश्चिमी भारत के 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 25, 2026 3:12 PM

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के बाद से देश में जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। उनका मानना है कि हर क्षेत्र की खास कला, परंपरा और उत्पादों को दुनिया में पहचान मिलनी चाहिए। जीआई टैग स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार दिलाने में मदद कर रहा है।