हिंदी से 'हिंग्लिश' तक, क्या हम एक 'नई हिंदी' के जन्म के दौर में हैं?
नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भाषा ही एक ऐसी कड़ी है, जो हमें अपनी मिट्टी, अपने इतिहास और अपनी संस्कृति से जोड़ती है। हर भाषा एक इतिहास, लोक परंपरा और जीवन-दृष्टि को लेकर चलती है, जो नई पीढ़ी के संस्कार को भी आगे बढ़ाती है। यही भाषाई बहुलता भारत की 'विविधता में एकता' की भावना को सशक्त बनाती है।