सावित्रीबाई फुले: अपशब्दों की बौछार से गुलामी की चुनौती तक, संघर्ष और तानों से तपकर बनीं 'नारी शिक्षा की अग्रदूत'
नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। उस दौर में जब लड़कियों की शिक्षा को पाप समझा जाता था, जब तमाम यत्न कर उनका रास्ता रोका जाता था, तब एक महिला ने अपशब्दों की बौछार, समाज की तानों और गुलामी की जंजीरों को चुनौती दी। रोजाना अपमान और हमलों से गुजरकर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अटूट संकल्प के साथ निकलकर वह भारत की 'नारी शिक्षा की अग्रदूत' बनीं।