यादों में रेणु : 'मैला आंचल' के 'गुलफाम', समाज, साहित्य और सादगी को साधने वाले शब्दशिल्पी
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। हर साल की 11 अप्रैल कैलेंडर पर दर्ज सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह तारीख उस आवाज की खामोशी का प्रतीक है जिसने गांव, खेत, गंध, लोक और मनुष्य के छोटे-छोटे सुख-दुख को शब्दों में ऐसा ढाला कि वे हमेशा के लिए जीवंत हो गए। साल 1977 में 11 अप्रैल को ही साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का निधन हुआ था। इस दिन उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश जरूर हो गई, लेकिन उनकी लिखावट आज भी रंगमंच से लेकर लोगों के जीवन में उपस्थित है।