जब सुभाष चंद्र बोस ने इतिहास को नया मोड़ दिया, हिंदुस्तान की आजादी से पहले बना चुके थे सरकार, हिल गया था ब्रिटिश साम्राज्य
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। "गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए एक दिल-एक प्राण होकर कटिबद्ध हो जाइए। हिंदुस्तान अब गुलाम नहीं रह सकता और न कोई ताकत इसे गुलाम रख सकती है।" 'नेताजी' सुभाष चंद्र बोस का यह जोशीला भाषण मात्र नहीं था, बल्कि वह दृढ़ संकल्प था, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला डाली। जब पूरा देश ब्रिटिश साम्राज्य से आजादी पाने की जद्दोजहद में उबल रहा था, तब देश और देश के बाहर कई वीर आजादी के इस अग्निकुंड में 'आजाद हिंदुस्तान' की लौ प्रज्वलित कर रहे थे, जिनसे अंग्रेज भी खौफ खाते थे। ऐसे ही महान सपूत थे, नेताजी सुभाष चंद्र बोस।