फल्गुनी, प्यार और दशरथ, 'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं' वाले हौसले से पहाड़ में बनाया रास्ता
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। 'भगवान के भरोसे मत बैठिए, क्या पता भगवान हमारे भरोसे बैठा हो!' यह महज एक संवाद नहीं, बल्कि उस शख्स की जीवन दृष्टि है, जिसने दुनिया को सिखाया कि अगर इंसान ठान ले, तो पत्थर का सीना चीरकर भी रास्ता बनाया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की।