2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा भारत, 9 रिएक्टरों का निर्माण जारी: सरकार

2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा भारत, 9 रिएक्टरों का निर्माण जारी: सरकार

नई दिल्ली, 28 अगस्त (आईएएनएस)। भारत ने स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता विस्तार की गति तेज कर दी है। एक आधिकारिक फैक्टशीट में शुक्रवार को कहा गया है कि वर्तमान में देश में 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर संचालित हो रहे हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट है। इसके अलावा, 9 नए रिएक्टरों का निर्माण जारी है, जिनकी संयुक्त क्षमता 7.5 गीगावाट होगी। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाए हैं। परमाणु ऊर्जा मिशन (2025-26) और शांति अधिनियम, 2025 जैसे उपायों के माध्यम से क्षमता विस्तार को गति दी जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना है।

फैक्टशीट में कहा गया है कि सरकार ने स्वदेशी तकनीक पर आधारित 10 प्रेसराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) को फ्लीट मोड में स्थापित करने की मंजूरी भी दी है। इसके साथ ही 500 मेगावाट क्षमता वाले दो फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (एफबीआर) के लिए प्रारंभिक परियोजना गतिविधियों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम लंबे समय से तकनीकी आत्मनिर्भरता की रणनीति पर आधारित रहा है। यह रणनीति उन ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन प्रतिबंधों और तकनीकी सीमाओं का सामना करना पड़ा था। इसी कारण भारत ने अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग पर आधारित दीर्घकालिक नीति विकसित की।

फैक्टशीट में भारत के स्वदेशी तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत देश धीरे-धीरे यूरेनियम आधारित ईंधन चक्र से थोरियम आधारित ईंधन चक्र की ओर बढ़ रहा है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसके पास थोरियम संसाधनों का बड़ा भंडार उपलब्ध है और भविष्य में यह स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है।

सरकार का मानना है कि यह कार्यक्रम सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, स्वच्छ एवं भरोसेमंद बिजली उत्पादन बढ़ेगा और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

परमाणु कचरे के प्रबंधन के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमता विकसित की है। देश उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास उच्च स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे के विट्रिफिकेशन की तकनीक उपलब्ध है। इस प्रक्रिया के तहत रेडियोधर्मी कचरे को कांच जैसी स्थिर संरचना में परिवर्तित किया जाता है, जिससे उसका दीर्घकालिक भंडारण, परिवहन और अंतिम निपटान अधिक सुरक्षित हो जाता है।

फैक्टशीट के अनुसार, बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए सरकार ने परमाणु ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया है। देश को ऐसे ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता है जो स्वच्छ, भरोसेमंद और चौबीसों घंटे उपलब्ध रह सकें। परमाणु ऊर्जा इस आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

परमाणु ऊर्जा से बिना कार्बन उत्सर्जन के लगातार बिजली उत्पादन संभव होता है। यह सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का पूरक बनकर ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती है। साथ ही, इससे आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है और भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिलती है।

सरकार ने कहा कि भारत परमाणु ईंधन चक्र के प्रत्येक क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं विकसित कर रहा है। इसमें रिएक्टर डिजाइन, ईंधन निर्माण, रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन और उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा योजनाएं निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो 2047 तक भारत वैश्विक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर सकता है और अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को अधिक टिकाऊ तरीके से पूरा कर सकेगा।

--आईएएनएस

डीबीपी