मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। नाखूनों को हम अक्सर हाथों की खूबसूरती और साफ-सफाई का हिस्सा मानते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक नाखून सिर्फ सुंदर दिखने के लिए नहीं होते, बल्कि उनमें होने वाले कुछ बदलाव शरीर की अंदरूनी हालत के बारे में भी जानकारी दे सकते हैं। नाखून धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए शरीर में लंबे समय तक चलने वाली कुछ परेशानियों का असर उनकी रंगत, मोटाई और बनावट में दिखाई दे सकता है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि नाखून में बदलाव दिखते ही कोई बड़ी बीमारी मान ली जाए। कई बार इसके पीछे चोट, संक्रमण या रोजमर्रा के सामान्य कारण भी हो सकते हैं।
नाखूनों के पीले पड़ने की वजह कई बार फंगल इंफेक्शन होती है। ऐसे मामलों में नाखून सिर्फ पीले नहीं होते, बल्कि मोटे और कमजोर भी हो सकते हैं। कुछ लोगों में नाखून टूटने लगते हैं या उनकी सामान्य चमक खत्म हो जाती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर होता है।
वहीं, अगर नाखून बहुत ज्यादा सफेद या फीके दिखाई दे रहे हैं, तो इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ स्थितियों में यह खून की कमी यानी एनीमिया से जुड़ा हो सकता है। इसलिए अगर नाखूनों में बदलाव के साथ लगातार थकान या कमजोरी भी महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना सही रहेगा।
नाखूनों का असामान्य रूप से सफेद दिखना भी कई स्वास्थ्य स्थितियों में देखा गया है। मेडिकल रिसर्च में नाखूनों के सफेद होने को कुछ मामलों में लिवर की बीमारी और दूसरी अंदरूनी समस्याओं से जोड़ा गया है। लेकिन नाखून का रंग अकेले किसी बीमारी की पहचान नहीं होता।
नाखूनों की मोटाई और उनकी मजबूती में बदलाव का संकेत होता है। अगर नाखून लगातार मोटे, सूखे या आसानी से टूटने लगे हैं, तो इसके पीछे संक्रमण के अलावा कुछ दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में भी नाखूनों की ग्रोथ और उनकी बनावट में बदलाव देखा गया है। इसलिए अगर नाखून लंबे समय से सामान्य नहीं दिख रहे और इसके साथ वजन में बदलाव, थकान या शरीर में दूसरी परेशानी भी महसूस हो रही है, तो जांच कराना बेहतर है।
नाखून पर बनी गहरी आड़ी लकीरों को मेडिकल भाषा में 'ब्यूज लाइंस' कहा जाता है। ये लकीरें तब दिखाई दे सकती हैं जब कुछ समय के लिए नाखून की बढ़ने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाए। ऐसा तेज बुखार, गंभीर बीमारी, चोट या शरीर पर पड़े किसी बड़े तनाव के बाद हो सकता है। कुछ इलाज, जिसमें कीमोथेरेपी भी शामिल है, उसके बाद भी ऐसी लकीरें दिखाई दे सकती हैं। चूंकि नाखून धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए कई बार बीमारी या तनाव खत्म होने के काफी समय बाद भी उसका निशान नाखून पर नजर आता है।
सबसे ज्यादा ध्यान नाखून के नीचे बनने वाली नई काली या भूरी लकीर पर देना चाहिए। ऐसी लाइन चोट, त्वचा के रंग में बदलाव या दूसरे सामान्य कारणों से भी हो सकती है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में यह नाखून के नीचे होने वाले मेलानोमा का संकेत हो सकती है। मेलानोमा एक गंभीर तरह का त्वचा कैंसर है। अगर ऐसी लाइन अचानक दिखाई दे, समय के साथ चौड़ी या गहरी हो रही हो, उसका रंग बदल रहा हो या आसपास की त्वचा पर भी बदलाव नजर आए, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है।
--आईएएनएस
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