नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। यूनानी चिकित्सा पद्धति में हवा को सिर्फ सांस लेने का जरिया नहीं, बल्कि हमारे शरीर के संतुलन और स्वास्थ्य से सीधा जोड़कर देखा गया है। हर मौसम के अपने गुण होते हैं। कुछ गर्म, कुछ ठंडे, कुछ नम और कुछ सूखे, और ये गुण हमारे शरीर पर असर डालते हैं। अगर हम अपनी आदतें, कपड़े पहनने का तरीका, खाना-पीना और व्यायाम मौसम के हिसाब से बदल लें, तो हम बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं और तंदरुस्त रह सकते हैं।
असल में, यूनानी पद्धति हमें यही सिखाती है कि स्वास्थ्य सिर्फ दवाओं से नहीं बनता, बल्कि हमारी जीवनशैली और वातावरण के तालमेल से बनता है। अगर हम मौसम के बदलाव और हवा के गुणों के अनुसार अपने खान-पान, कपड़े और व्यायाम को एडजस्ट करें, तो रोगों से बचाव आसान हो जाता है।
सर्दियों में हवा ठंडी और सूखी होती है। यूनानी विद्वानों के अनुसार, इस समय शरीर को ठंड और सूखापन जल्दी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में हमें ज्यादा गर्म कपड़े पहनने चाहिए, हल्का गर्म खाना खाना चाहिए और ठंडी हवा में ज्यादा देर नहीं रहना चाहिए। इसके अलावा, हल्का व्यायाम करना चाहिए ताकि शरीर की गर्मी बनी रहे और खून का बहाव सही रहे। इसी तरह गर्मियों में हवा गर्म और कभी-कभी नम होती है। इस मौसम में शरीर ज्यादा थकता है और पसीना जल्दी आता है। इसलिए हल्का और हवादार कपड़ा पहनें, खूब पानी पिएं और ज्यादा भारी खाना खाने से बचें।
बस यही नहीं, यूनानी चिकित्सा में साफ और ताजी हवा का बहुत महत्व है। ज्यादातर बीमारियों का संबंध दूषित या बंद जगहों की हवा से होता है। इसलिए भीड़भाड़ वाले या खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों में लंबे समय तक रहना नुकसानदेह हो सकता है। अगर आप अपने घर और काम की जगह को अच्छी तरह हवादार रखें, पौधे लगाएं और ताजी हवा लेने के लिए बाहर समय बिताएं, तो शरीर और दिमाग दोनों तरोताजा रहेंगे।
मौसम के अनुसार, अपनी दिनचर्या बदलना भी बहुत जरूरी है। जैसे बरसात के मौसम में हवा नम रहती है, इसलिए शरीर में नमी ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में भारी और तैलीय भोजन से बचें और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। इसी तरह शरद ऋतु में हवा थोड़ी ठंडी और सूखी होती है, तो शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा पानी पिएं और सूखी चीजों से परहेज करें।
--आईएएएनएस
पीआईएम/एबीएम