सामाजिक मुद्दे, क्राइम और इमोशंस का दमदार मिश्रण, स्टारकास्ट ने बताया क्यों खास है ‘द नर्मदा स्टोरी’

IANS | May 29, 2026 10:18 PM

मुंबई, 29 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनी अपकमिंग क्राइम-ड्रामा फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार, सामाजिक अन्याय और एक आदिवासी महिला के संघर्ष की कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करने जा रही है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एक आदिवासी महिला न्याय के लिए लड़ती है और व्यवस्था की सच्चाइयों का सामना करती है। फिल्म की टीम इश्तियाक खान, आईपीएस अधिकारी और अभिनेत्री सिमाला प्रसाद, अभिनेता मुकेश तिवारी, और निर्देशक जैगम इमाम ने फिल्म के विषय, किरदारों और सामाजिक संदेश पर समाचार एजेंसी आईएएनएस से खुलकर बात की।

'यूं कोई बेवफा नहीं होता' कहा और दुनिया को अलविदा कह पाठकों संग 'बेवफाई' कर गए बशीर बद्र

IANS | May 28, 2026 4:29 PM

नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। उर्दू अदब का एक नरम लहजा हमेशा के लिए खामोश हो गया। अपनी सादगी भरी शायरी से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले शायर बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। पद्मश्री से सम्मानित बशीर बद्र ने गुरुवार को भोपाल स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही उर्दू शायरी का एक ऐसा खूबसूरत और नरम लहजा खामोश हो गया, जिसने आम आदमी की भावनाओं को बेहद आसान शब्दों में दुनिया के सामने रखा। उनके निधन से प्रशंसक कसक के साथ बस इतना ही कह पाए "फिर से खुदा बनाएगा कोई नया जहां, दुनिया को यूं मिटाएगी इक्कीसवीं सदी...।"

इस वजह से रोजाना ट्रेन पकड़कर मुंबई जाते थे महबूब खान, भनक लगते ही पिता ने जमकर की थी पिटाई

IANS | May 28, 2026 10:10 AM

मुंबई, 27 मई (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा जगत को यादगार और कभी पुरानी न होने वाली मदर इंडिया जैसी फिल्में देने वाले निर्माता-निर्देशक महबूब खान की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। बचपन में फिल्मों का ऐसा जुनून था कि वह रोज ट्रेन पकड़कर आसपास के शहरों के साथ ही मुंबई तक फिल्में देखने चले जाते थे। एक दिन जब परिवार को उनके मुंबई भागने की भनक लगी, तो पिता ने उन्हें पकड़कर डांटा, पिटाई की और वापस गांव ले आए।

यादों में महबूब : जिनकी स्क्रिप्ट पर हंसते और दरवाजा बंद कर देते थे मेकर्स, उसी फिल्मकार ने देश को दी ‘मदर इंडिया’

IANS | May 27, 2026 11:11 PM

मुंबई, 27 मई (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में जब भी महान फिल्म मेकर्स का जिक्र होता है, तो महबूब खान का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। एक ऐसा फिल्मकार, जिसने गरीबी, संघर्ष और लगातार ठुकराए जाने के बावजूद हार नहीं मानी और आगे चलकर दुनिया को ‘मदर इंडिया’ जैसी क्लासिक और बेहतरीन फिल्म दी।

कश्मीरी केसर से बनारसी साड़ी तक, परंपरा और संस्कृति के साथ देश की पहचान बने उत्तर भारत के ये 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 27, 2026 3:04 PM

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। उत्तर भारत के पारंपरिक उत्पाद आज देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर नई मजबूती दे रहे हैं। कश्मीर का केसर, हिमाचल की कुल्लू शॉल, उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी, राजस्थान की ब्लू पॉटरी और उत्तराखंड की लोक कलाएं अब केवल स्थानीय उत्पाद नहीं रह गए, बल्कि गांव और छोटे शहरों से निकलकर ये जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) उत्पाद ग्लोबल मंच पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं।

स्मृति शेष : महंत अवैद्यनाथ ने धर्म को समाजसेवा और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा

IANS | May 27, 2026 12:21 PM

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। भारत के संतों में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो केवल मठ और मंदिर तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि वे समय की धारा में एक वैचारिक आंदोलन बने। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज ऐसे ही एक व्यक्तित्व थे। वे गोरखनाथ मठ के पीठाधीश्वर होने के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, हिंदू समाज की एकता और लोककल्याण की उस चेतना के वाहक थे, जिसने पूर्वांचल से लेकर पूरे देश के लोगों पर गहरी छाप छोड़ी।

मिथिला मखाना से चांदी तरकाशी तक, भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दे रहे पूर्वी और मध्य भारत के 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 26, 2026 12:02 PM

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। भारत की असली पहचान उसकी विविधता, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों में बसती है। देश के अलग-अलग राज्यों में सदियों से तैयार हो रहे पारंपरिक उत्पाद आज दुनिया भर में अपनी अलग छाप छोड़ रहे हैं। इन उत्पादों को मिलने वाला जीआई टैग यानी ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ न केवल उनकी विशिष्ट पहचान को सुरक्षित करता है, बल्कि स्थानीय किसानों, बुनकरों और कारीगरों की मेहनत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम भी करता है।

मिट्टी, मेहनत और पहचान : गांवों से निकलकर दुनिया को अपनी कहानी सुना रहे पश्चिमी भारत के 'जीआई' उत्पाद

IANS | May 25, 2026 3:12 PM

नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के बाद से देश में जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। उनका मानना है कि हर क्षेत्र की खास कला, परंपरा और उत्पादों को दुनिया में पहचान मिलनी चाहिए। जीआई टैग स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार दिलाने में मदद कर रहा है।

गदर क्रांति से आजाद हिंद फौज तक: अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाले क्रांतिकारी रास बिहारी बोस

IANS | May 24, 2026 10:47 PM

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे क्रांतिकारी हुए, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश को आजाद कराने के लिए समर्पित कर दी। उन्हीं महान सेनानियों में एक नाम रास बिहारी बोस का भी है। गदर क्रांति से लेकर आजाद हिंद फौज की नींव मजबूत करने तक, उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐसा संघर्ष छेड़ा, जिसने ब्रिटिश हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। उन्हें आज भी अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाला क्रांतिकारी कहा जाता है।

मूगा सिल्क से नागा मिर्च तक, दुनिया के मंच पर चमक रहा पूर्वोत्तर भारत का 'जीआई' गौरव

IANS | May 24, 2026 3:03 PM

नई दिल्ली, 24 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इटली यात्रा केवल राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस दौरे ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। दुनिया के बड़े नेताओं को भारत के अलग-अलग राज्यों से चुने गए जीआई टैग प्राप्त उत्पाद भेंट कर प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता, परंपरा और स्थानीय हुनर में बसती है।