सर रतनजी टाटा: जिनकी उदारता से गोखले और महात्मा गांधी का आंदोलन हुआ था मजबूत

IANS | September 5, 2024 11:46 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। आज हम अपनी जिंदगी के किसी भी हिस्से को उठाकर देखते हैं तो टाटा कंपनी के किसी न किसी ब्रांड से हमारा वास्ता पड़ ही जाता है। चाहे आप सड़क से जा रहे हों, हवाई यात्रा कर रहे हों, किसी होटल में ठहर रहे हों, या सिर्फ अपने घर पर भी हों...'टाटा' आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा है। टाटा समूह के एक ऐसे ही अहम सदस्य थे सर रतनजी जमशेदजी टाटा, जिनके लिए बिजनेस सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का साधन भी था।

जब परिवार का खर्चा चलाने के लिए घर-घर जाकर ट्यूशन देने लगे सर्वपल्ली राधाकृष्णन

IANS | September 5, 2024 9:57 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षा की अलख जगाने वाले भारत रत्न डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षकों के प्रयासों को समर्पित है। देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले राधाकृष्णन ने अथक प्रयास किया। तमाम परेशानियां झेलीं, घर खर्च चलाने के लिए होम ट्यूशन दिया पर शिक्षा के प्रति ईमानदारी कभी नहीं छोड़ी। अपने प्रोफेशन से उन्हें गहरा लगाव था।

जानिए, 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? क्या है इस बार की थीम?

IANS | September 5, 2024 9:20 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में शिक्षक दिवस की स्थापना का इतिहास 62 साल पुराना है। नींव 5 सितंबर 1962 को पड़ी। यह दिन भारतीय शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित है। इसी दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, जिसने आपको किताबों का दिया ज्ञान वही नहीं हैं केवल आपके शिक्षक

IANS | September 5, 2024 8:47 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ हमारे संतों ने जगत में गुरु को ही सर्वश्रेष्ठ माना है। क्योंकि गुरु ही छात्रों के एक मात्र हितैषी हैं, वे सब कुछ करने वाले हैं, बिना उनके ज्ञान रूपी आशीर्वाद के कुछ भी नहीं होने वाला है। ऐसे में गुरु के अतिरिक्त किसी और पर भरोसा करने वाला ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता।

यत्र तत्र सर्वत्र : शरद, समाज और सरकार, सिस्टम पर व्यंग्य बाण चलाने वाला साहित्यकार

IANS | September 5, 2024 8:18 AM

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। 'तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि।' भले ही यह व्यंग्य लगे। लेकिन, यह हमारे समाज, हमारे परिवार और हमारे समय की सच्चाई है। ऐसा लिखने वाला शख्स समाज की हर उस नब्ज को टटोलने में माहिर है, जिसके जरिए हम रिश्तों को परिभाषित करने का 'दंभ' भरते और 'इतराते' दिख जाते हैं।

'गुनाहों का देवता' को गुजरे 27 बरस, एक रचनाकार जो हर चंदर और सुधा का बना संबल

IANS | September 4, 2024 9:46 AM

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। सर्दियों की हल्की धूप में ना ठंडक और ना गर्मी का अहसास, एक पहाड़ और हर तरफ हरियाली, कानों में कोयल की कूक, सब कुछ सपनों की दुनिया जैसी... अचानक सपना टूटता है, आंखें खुलती है और नजरें किताब के पन्ने पर पड़ती है।

भारतीय राजनीति के 'पितामह', जिन्होंने पहली बार 'ब्रिटिश राज की लूट' से जुड़ी थ्योरी की पेश

IANS | September 4, 2024 9:34 AM

नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। दादा भाई नौरोजी को 'भारतीय राजनीति का पितामह' कहा जाता है। वह दिग्गज राजनेता, उद्योगपति, शिक्षाविद् और विचारक भी थे। वह काफी मेधावी छात्र रहे और शिक्षक उनकी खूब तारीफ भी करते थे। साल 1845 में वह एल्फिन्स्टन कॉलेज में गणित के प्राध्यापक बने।

'महाश्वेता' और 'एम सी मेहता' एक युग प्रवर्तक तो दूसरा पर्यावरण संरक्षक कैसे इन दो महान विभूतियों को देश करेगा याद

IANS | September 1, 2024 9:21 AM

नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। साल था 1997 का और भारत अपनी आजादी के 50 साल पूरे कर रहा था। इस सब के बीच भारत के दो युग प्रवर्तकों को इस साल दुनिया में खूब सुना गया। ये थे महाश्वेता देवी और एम सी मेहता। महाश्वेता देवी साहित्यकार, उपन्यासकार, निबन्धकार के साथ ही समाज में अपनी रचनाओं के जरिए एक अलग विश्वास पैदा कर चुकी थीं तो दूसरी तरफ दुनिया में पर्यावरण बचाने को लेकर उठते शोर के बीच एक और मसीहा था जो इसके संरक्षक के तौर पर उभरकर सामने आया था नाम था एम सी मेहता। दोनों को 1 सितंबर के दिन ही रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया।

शिवाजी सावंत: जिनके पहले ही उपन्यास ‘मृत्युंजय’ ने रचा कीर्तिमान, अंगराज कर्ण की कहानी बयां कर हो गए अमर

IANS | August 31, 2024 2:13 PM

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। महाभारत का कर्ण कुछ अलग ही था। सूर्य कवच और कुंडल वाला महा दानवीर जिसने जीवन में बहुत कुछ सहा। जो कुंती के परित्यक्त पुत्र ने सहा उसकी गाथा को शिवाजी सांवत ने एक उपन्यास का आकार दे दिया। मराठी कृति का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ और आज भी साहित्य जगत में 'मृत्युजंय' का खास दखल है।

परिवार से ज्यादा फॉलोअर्स से कनेक्टेड होते हैं जेन ज़ेड

IANS | August 30, 2024 4:50 PM

नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। आज के युवाओं को अक्सर 'जेन ज़ेड' के नाम से जाना जाता है। यह पीढ़ी तकनीक के साथ पली-बढ़ी है और सोशल मीडिया उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। सोशल मीडिया, हालांकि संचार और जुड़ाव का एक शक्तिशाली माध्यम है। सोशल मीडिया ने दुनिया को करीब लाने का काम तो किया है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है।