मोहन भागवत का बड़े परिवार का आह्वान बहुत सामयिक है
नई दिल्ली, 19 दिसंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पिछले दिनों तीन बच्चे पैदा करने की वकालत कर एक व्यापक बहस को जन्म दे दिया। हालांकि आलोचकों ने उनके सुझाव को प्रतिगामी बताते हुए खारिज कर दिया, लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि उनका आह्वान जनसंख्या विज्ञान में निहित है और समकालीन भारत की सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को दर्शाता है। यह परिप्रेक्ष्य, काल और दोष युक्त होने से इतर, भारत की भविष्य की जनसांख्यिकीय स्थिरता, आर्थिक स्थिरता और सांस्कृतिक संरक्षण के बारे में दबाव वाली चिंताओं के साथ मेल खाता है।