इस्मत आपा : अश्लील लेखिका का 'तमगा', कोर्ट का चक्कर, शब्दों ने बनाया 'लेडी चंगेज खान'
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। साहित्य जगत में 'लेडी चंगेज खान' के नाम से मशहूर इस्मत चुगताई किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं।
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। साहित्य जगत में 'लेडी चंगेज खान' के नाम से मशहूर इस्मत चुगताई किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं।
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। 21 अगस्त 1911 की सुबह थी। ऊंघता पेरिस अंगड़ाई ले रहा था। लूव्र म्यूजियम के आस पास शांति थी। इसी दौरान तीन शख्स भारी कंबल की परत के भीतर म्यूजियम से कुछ लेकर जाते दिखे। क्या था इनके हाथों में! इसका जवाब अगले 24 घंटे तक किसी के पास नहीं था। इन चोरों के हाथ में लियोनार्डो द विंची की मोनालिसा थी। अमर कृति जो चोरी होने के बाद चर्चा में आई। दो साल बाद मिली तब पता चला कि चोरी की वजह क्या थी!
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बचपन में अंग्रेजों के खिलाफ ऐसी आवाज बुलंद की कि डॉक्टर ने कड़वी दवाई को मीठा करने के लिए उसमें चीनी मिलाई तो दवा खानी ही छोड़ दी। यरवदा जेल में बापू ने कह दिया कि तुमने मुझसे झूठ बोला, धोखा दिया और पपीता खिलाया तो इन्होंने कसम खा ली कि ताउम्र पपीता नहीं खाउंगा। मीठे से दूरी के बाद भी जिनकी कलम साहित्य रचना के समय मिठास से भरी रही। उनकी साहित्यिक भाषा और शैली ओजस्वी थी क्योंकि उन्हें पराधीनता रास नहीं आती थी। अपने निबंधों को जिन्होंने हमेशा व्याख्यात्मक शैली में लिखा और कुछ रचनाएं तो ऐसी जिसमें उन्होंने विचारक के तौर पर उपदेशात्मक शैली के दर्शन कराए।
नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। "सफलता के लिए उम्र कोई बाधा नहीं, बल्कि ज्ञान की सीढ़ी है...एक ऐसी दुनिया जहां लगातार परिवर्तन हो रहा है, वहां बुजुर्गों में ज्ञान, अनुभव और स्थिरता का भंडार है।" किसी अज्ञात द्वारा कही ये लाइनें उम्रदराज होने की अहमियत को बखूबी बयां करती हैं। क्योंकि "बूढ़ा होना बीमारी नहीं बल्कि एक जीत है।" जिंदगी की इस जीत के प्रति हमें संवेदनशील बनाने के लिए 21 अगस्त को मनाया जाता है 'विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस।'
हाजीपुर (बिहार), 20 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के हाजीपुर जिले में मगंलवार रात बाइक सवार बदमाशों ने एक वार्ड पार्षद की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना सदर थाना क्षेत्र के दिग्गी कला पश्चिमी की है।
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। वो 70 का दौर था। विदेश में नौकरी करते हुए नागवारा रामाराव नारायण मूर्ति ने यूरोप घूमने का फैसला किया, जानते थे कि फैसला अब न लिया तो घूम नहीं पाएंगे। दुनिया को समझ नहीं पाएंगे। निकल पड़े सैर पर, लेकिन हिचहाइकिंग के जरिए। यानि लिफ्ट लेकर मुफ्त में ट्रैवल करने के तरीके को अपना।
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। 'हमेशा पुरानी पीढ़ी नई पीढ़ी से निराश रही है। नई पीढ़ी भी पुरानी पीढ़ी बनकर निराश होती रही है।' अरसे पहले कवि त्रिलोचन की इन बातों से आज के दौर के लोग जरूर इत्तेफाक रखते होंगे।
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। 20 अगस्त 1988 का दिन नेपाल के लिए एक बुरे सपने से कम नहीं था। इस दिन आए जलजले ने तबाही मचा दी थी। सड़क के चारों ओर दिल दहलाने देने वाला मंजर था किसी ने अपनी परिवार को खो दिया था तो कई लोगों के घर जमींदोज हो गए थे। लोगों ने इस भूकंप में अपना बहुत कुछ गंवाया।
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में दुनिया ने बांग्लादेश को उजड़ते देखा। भीड़ का कोई ईमान नहीं होता इसका सुबूत भी देखा। शेख मुजीबुर्रहमान की आदमकद प्रतिमा की बेअदबी होते देखी। दिल दहला देने वाला मंजर था, यह वो तस्वीरें थीं जो कुछ दिनों बाद किसी दूसरी तस्वीर से रिप्लेस हो जाएंगी लेकिन स्मृति पटल पर हमेशा रहेंगी। ये इतिहास के सीने पर खुरच के जड़ दी गई हैं।
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। फिल्म 'उमराव जान' के गाने 'दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिए' का अपना ही क्रेज़ है। नजाकत से भरी रेखा की अदाएं, शहरयार के रूमानी बोल और आशा भोसले की खनकती आवाज़ के आज भी करोड़ों फैंस हैं। इस गाने को इसका म्यूजिक कंप्लीट करता है, जिसके पीछे हैं... खय्याम। इस गीत का एक हिस्सा है, 'इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार, दीवारों-दर को गौर से पहचान लीजिए'... शायद, खय्याम भी दूसरी दुनिया से यही कह रहे हैं। हम बात कर रहे हैं मोहम्मद ज़हूर हाशमी की, जिनका तखल्लुस 'खय्याम' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसता है।