बंगाल का वो 'शेर' जिसने हंसते-हंसते चूमा फांसी का फंदा, अंतिम विदाई देने पहुंचे था पूरा शहर, अर्थी भी समर्थकों ने खरीदी
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। 20 साल की ही तो उम्र थी लेकिन बिना कुछ सोचे समझे उसने प्रण किया और मां भारती को आजाद कराने के इरादे संग खुद को झोंक दिया। इस जांबाज का नाम था कानाईलाल दत्त। फांसी के बाद अंग्रेज वार्डेन तक ने कहा था “मैं पापी हूं जो कानाईलाल को फांसी चढ़ते देखता रहा। अगर उसके जैसे 100 क्रांतिकारी आपके पास हो जाएं तो आपको अपना लक्ष्य कर के भारत को आजाद करने में ज्यादा देर न लगे।”