स्वामी शिवानंद: अर्धचेतन अवस्था की खोज और रामकृष्ण परमहंस से ऐतिहासिक भेंट
नई दिल्ली, 15 दिसंबर (आईएएनएस)। साल 1882 की बात है, जब एक दिन रामकृष्ण परमहंस 'अर्धचेतन अवस्था' में उत्सुक श्रोताओं से संवाद कर रहे थे। उसी समय एक युवा संन्यासी वहां आ पहुंचा, जिसने पारिवारिक सुख-वैभव त्याग कर आध्यात्म के पथ को अपना लिया था। वह 'अर्धचेतन अवस्था' के रहस्य को समझने के लिए अत्यंत उत्सुक था। रामकृष्ण के कुछ शब्द उसके कानों में पड़े और उसके कदम वहीं ठहर गए। यही वह ऐतिहासिक क्षण था, जब रामकृष्ण मिशन के महान संन्यासी स्वामी शिवानंद पहली बार अपने गुरु से मिले।