ओरछा का भव्य महल, जहां की रसोई बनी भगवान श्रीरामचंद्र का दरबार, 'दशरथ नंदन' ने रखी थी रानी के सामने 'तीन शर्त'

IANS | April 18, 2026 11:29 PM

ओरछा, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। वास्तुकला की खूबसूरती, भक्ति और सुंदर कथाओं से भरी जगहें देखनी हो तो भारत में ऐसी जगहों की कमी नहीं, जहां भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां वास्तुकला की खूबसूरती आंखों को लुभाती है और भक्ति की कथाएं दिल को छू जाती हैं। मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राजा महल भी ऐसी ही एक अनोखी जगह है। यहां का साधारण सा रसोईघर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का दिव्य दरबार बन चुका है, जहां उनकी पूजा राजा की तरह की जाती है। इस महल से जुड़ी प्राचीन कथा भक्ति, प्रेम और चमत्कार से भरी हुई है।

मां बाराही मंदिर: यहां किसी प्रतिमा की नहीं, सुरंग की होती है पूजा, दर्शन मात्र से दूर होते हैं नेत्र रोग

IANS | April 18, 2026 3:15 PM

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। देश भर में मां सती के 51 शक्तिपीठ मंदिर स्थित हैं और हर मंदिर की अपनी आस्था और पौराणिक इतिहास है।

ताबो: यहां आज भी जीवित है बौद्ध विरासत, प्राचीन मठों से लेकर अध्यात्म का अनोखा संगम

IANS | April 18, 2026 2:47 PM

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमालय की गोद में कुछ ऐसी अनोखी जगह छिपी है, जिसके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है। उत्तर भारत में पहाड़ों में घूमने के लिए कई पर्यटन स्थल हैं, जहां सबसे लोकप्रिय स्थल है स्पीति घाटी।

आर्किटेक्चरल अजूबा है ओरछा का अद्भुत 'सावन भादो' स्तंभ, इंद्र देव से जुड़ी है मान्यता

IANS | April 17, 2026 11:15 PM

ओरछा, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के कई हिस्सों में वास्तुकला के अद्भुत उदाहरण देखने को मिल जाते हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश ओरछा के शांत और भव्य माहौल में खड़े किले, मंदिर और कुछ खंभे आगे हैं, जो न सिर्फ आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का अनोखा चमत्कार भी कहे जा सकते हैं। यह इलाका इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सुंदरता से भरा पड़ा है। ऐसा ही अद्भुत ‘सावन भादो खंभा’ या ‘सावन भादो स्तंभ’ है, जो बुंदेला राजवंश की कलात्मकता, बुद्धिमत्ता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का जीवंत प्रमाण हैं।

1558 में बना नारायण का भव्य मंदिर, सबसे ऊंचे शिखर वाले देवालय के निर्माण के पीछे है भक्ति से भरी अद्भुत कथा

IANS | April 17, 2026 10:57 PM

ओरछा, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है। भारत भूमि के कोने-कोने में भगवान की महिमा का बखान करते कई भव्य और अद्भुत देवालय हैं। ऐसा ही अद्भुत, खूबसूरत वास्तुकला वाला मंदिर मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र भगवान नहीं बल्कि राजा के रूप में पूजे जाते हैं। मंदिर निर्माण के पीछे की कथा भी भक्ति से भरी पड़ी है।

भीमेश्वर मंदिर : प्रकृति और इतिहास का संगम, महाबली भीम ने स्वयं की थी स्थापना

IANS | April 17, 2026 5:54 PM

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिस पर श्रद्धालुओं की बेहद आस्था होती है। हरे-भरे पश्चिमी घाटों में स्थित मंदिर भक्तों के साथ-साथ पर्यटन के आकर्षण का भी बड़ा केंद्र हैं। आज हम ऐसे मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं, जिसका इतिहास महाभारत के पांडवों से जुड़ा है।

वैशाख अमावस्या : प्रयागराज में श्रद्धालुओं का तांता, गंगा में डुबकी लगा पितरों की शांति की कर रहे कामना

IANS | April 17, 2026 9:21 AM

प्रयागराज, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। हिंदू पंचांग के अनुसार आज का दिन बेहद खास है क्योंकि आज वैशाख अमावस्या है। वैशाख अमावस्या के दिन स्नान और दान का बहुत महत्व होता है।

1662 ईस्वी में बने भव्य देवालय के गर्भगृह में कोई भी प्रतिमा नहीं, बेजोड़ वास्तुकला और विरासत की दिखती है झलक

IANS | April 16, 2026 11:02 PM

ओरछा, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। कभी क्षय न होने वाली विशेष तिथि यानी अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को पड़ रहा है। इस दिन नारायण व माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष विधान है। देश-दुनिया में लक्ष्मी नारायण को समर्पित कई मंदिर हैं। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ओरछा में भी लक्ष्मी नारायण को समर्पित शानदार मंदिर है, जो अनोखी वास्तुकला और समृद्ध विरासत की छटा बिखेरती है।

महारानी की छतरियां: राजपूत वंश की महिलाओं को समर्पित, इतिहास और सुंदरता का अनूठा संगम

IANS | April 16, 2026 8:48 PM

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान का जयपुर, यानी पिंक सिटी, अपने नाम की तरह ही अनोखा है। यह स्थल सिर्फ सुंदरता का ही संगम नहीं है, बल्कि जयपुर की राजपूताना इतिहास को खुद में समेटे हुए है। आज हम आपके लिए ऐसे पर्यटक स्थल की जानकारी लेकर आए हैं, जो खास तौर पर राजपूत वंश से जुड़ी महिलाओं को समर्पित है।

बांके बिहारी के चरण दर्शन से जगन्नाथ रथ निर्माण शुरू तक, अक्षय तृतीया पर मंदिरों में होते हैं खास आयोजन

IANS | April 16, 2026 4:53 PM

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को सबसे पवित्र और शुभ तिथि में से एक माना जाता है। बैसाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि नारायण को समर्पित है। संस्कृत में ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है ‘जो कभी खत्म न हो’, इसलिए इस दिन किए गए दान, पुण्य, नए कार्य शुरू करना और घर-मंदिर का निर्माण हमेशा फलदायी माना जाता है। इस दिन पूरे 24 घंटे शुभ रहते हैं। किसी भी शुभ काम के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती।