अलवर, 28 जून (आईएएनएस)। दुनिया में पहली बार सफल बाघ पुनर्वास का इतिहास रचने वाले सरिस्का टाइगर पुनर्स्थापन कार्यक्रम के 18 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रविवार को अलवर में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव तथा राजस्थान के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने किया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाघ संरक्षण की स्थिति, चुनौतियों और वन्यजीव आवास प्रबंधन के अनुभव साझा किए। मध्यप्रदेश के वन अधिकारियों ने अपने राज्य में चल रहे चीता पुनर्वास कार्यक्रम और उससे जुड़े अनुभवों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन के 18 वर्ष पूरे होने पर देशवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को बधाई दी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कभी बाघ विहीन हो चुका यह क्षेत्र आज फिर से समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक बन चुका है। वर्तमान में सरिस्का में 56 बाघों की मौजूदगी इस संरक्षण मॉडल की बड़ी सफलता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इसे केवल बाघों की वापसी नहीं, बल्कि प्रकृति के पुनर्जागरण, वैज्ञानिक संरक्षण और सामूहिक संकल्प की प्रेरक कहानी बताया। सरिस्का का बाघ पुनर्स्थापन कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुका है।
वन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए सरिस्का सहित राजस्थान के अन्य वन क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस क्षेत्र से कभी बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, वहां आज बाघों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। कार्यशाला के समापन के बाद प्रतिभागियों को सरिस्का टाइगर रिजर्व का फील्ड विजिट भी कराया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर संरक्षण प्रयासों को समझा जा सके।
उन्होंने कहा कि वन विभाग की सहायता से आज सरिस्का टाइगर रिजर्व में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे है, इसमें कोई दो राय नहीं है। आने वाले दिनों में और अच्छा काम होने वाला है। इसमें देश के 11 बाघ-आबादी वाले राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और 20 टाइगर रिजर्व व राष्ट्रीय उद्यानों के फील्ड डायरेक्टर शामिल हुए हैं।
आईबीसीए के डीजी डॉ. एसपी यादव ने कहा, "आज आयोजित की जा रही यह कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण और जरूरी है। आज हमारे कई टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या या तो उनकी क्षमता से ज्यादा हो गई है या फिर सीमा पर पहुंच गई है। साथ ही, देश में ऐसे टाइगर रिजर्व भी हैं जहां बाघ नहीं हैं या उनकी संख्या बहुत कम है। पर्यावरणविद् और वन्यजीव संरक्षणवादी चिंता जता रहे हैं कि 'प्रोजेक्ट टाइगर' की सफलता और बाघों की बढ़ती आबादी अब हमारे लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही है, क्योंकि इससे इंसान और बाघ के बीच टकराव बढ़ रहा है।"
--आईएएनएस
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