रोम, 18 मई (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। पीएम मोदी के इटली दौरे को लेकर जोरशोर से तैयारी चल रही है। लोगों में काफी उत्साह है। वहीं इटली में भारत की राजदूत वाणी राव ने कहा कि इटली में भारत का दीर्घकालिक दृष्टिकोण और अप्रोच असरदार रहा है।
इटली में भारत की राजदूत वाणी राव ने कहा, "खासकर इस साल हमने देखा है कि पूरे यूरोप में लोग अपने व्यापार को अलग-अलग तरह का बनाने में बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं। देश ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद व्यापार साझेदार भी खोज रहे हैं और भारत इसके लिए एकदम सही जगह पर है। हमने लगातार तेज आर्थिक बढ़ोतरी दर्ज की है। हम एक बहुत बड़ा मार्केट हैं और आप जानते हैं कि विकसित भारत का लॉन्ग-टर्म विजन और अप्रोच यहां सच में असरदार रहा है।"
भारतीय राजदूत ने कहा, "मैंने अभी बताया कि हमारे पास एक मौजूदा माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट है और उसके तहत सीजनल वर्क परमिट के तहत भारतीय वर्कर पहले से ही आ रहे हैं लेकिन हमारी उम्मीद है कि भविष्य में यहां जिस तरह की वर्कफोर्स है, उसमें और ज्यादा डायवर्सिटी होगी और हम इटली में और ज्यादा प्रोफेशनल्स को आते हुए देखेंगे।"
उन्होंने कहा कि हमारे लिए कल्चरल डिप्लोमेसी और लोगों के बीच संबंध बहुत जरूरी है। यहां का समुदाय भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। इटली में भी योग, आयुर्वेद, भारतीय फिल्में और भारतीय खाना, ये सब बहुत पॉपुलर हैं और आपने शायद सुना होगा कि इस साल वेनिस आर्ट बिएनाले में, भारत में कंटेम्पररी आर्ट का एक नेशनल पवेलियन है जिसे बहुत-बहुत सकारात्मक रिव्यू मिले हैं और बहुत सारे विजिटर आए हैं।"
इटली में भारत की राजदूत ने कहा कि भारत के लिए हमारी विदेश नीति में सुरक्षा सहयोग एक बड़ी प्राथमिकता है और आतंकवाद के प्रति हमारा जीरो टॉलरेंस अप्रोच है। इटली के साथ हमारा पहले से ही एक फ्रेमवर्क है, काउंटर-टेररिज्म पर एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप के रूप में एक डायलॉग फ्रेमवर्क। पिछले साल, दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद की फंडिंग का मुकाबला करने के लिए एक नई पहल की घोषणा की थी और हम इस साझा चिंता को दूर करने के लिए इटली के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।"
पीएम मोदी के आगामी इटली दौरे को लेकर उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री का दौरा बहुत जरूरी है। 2023 में दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी। उसके बाद एक पांच साल का एक्शन प्लान तैयार किया गया था और दोनों सरकारें अलग-अलग क्षेत्र में इसे लागू करने पर काम कर रही हैं।"
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