हिंदी से हिंग्लिश तक : लेखिका ने बताया- क्या यह क्षरण है या किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की स्मृतियों, भावनाओं, अनुभवों और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। समय के साथ समाज बदला, लोगों की जीवनशैली बदली, संचार के माध्यम बदले और उसके साथ हिंदी भी बदलती गई। कभी साहित्य और संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से पहचानी जाने वाली हिंदी आज अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, अरबी, स्थानीय बोलियों और इंटरनेट की भाषा के साथ कदमताल करती दिखाई देती है। ऐसे में यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि क्या यह हिंदी का क्षरण है या फिर किसी जीवित भाषा का स्वाभाविक विकास?